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दूध बेचनी(पुस्तक चर्चा)

लेखकिय सरोकार सँ जुड़ल जानल पहचानल नाम स्नातक श्री रामबिलास साहू मातृभाषा मैथिली लेल अहर्निश सेवक छथि ,दूधबेचनी कथा संग्रह ल केँ अयलाह अछि। एहि पोथीक आवरण पृष्टसज्जा मनमोहक अछि ,जहिपर प्रकाशन लोगो जगह छेकने छैक । पछिला गत्ता पर किमत 150 टाका सहित कथाकार सचित्र फोटो अपरिचय छापल छैक । 112 पृष्टक एहि पोथिक केँ ISBN प्राप्त भेल छैक । दाम 200 टाका । एक दर्जन खीसा में क्रम 9 पर मूल टाईटल , दुध बेचनी ,कथा सजावल गेलैक अछि ।एहिसँ पूर्व हिनक अंकुर कथा संग्रह पूर्व में प्रकाशित भ चुकल छन्हि ।अंशुमान कथा संग्रह अप्रकाशित कृति सेहो निकलय बाला अछि ।ओना हिनकर 2013 मेँ पद संग्रह रथक चक्का उलैट चलय बाट 2017 में कोशीक कछेर कव्य संग्रह सेहो विभिन्न प्रकाशन सँ निकल छैक 26 मई 2018 केँ दिल्लीः सँ साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुरजी एहि “दुधबेचनी” पोथीपर अपन समीक्षात्मक तथ्य परोशनय छैथि ,तयो एहि पोथीकेँ न्याय दिएबाक उदेशसँ वृह्द चर्चाकरव नैतिकबोध कराबैछ । जहिसँ पाठक वर्ग कं कथापरसँगक रोचकता सहजे भेटय।

मिथिलांचलमे स्थापित कथाकारक लीकसँँ हटि कए ‌बढ़ निमन कथा हिनकर होइछ तकर एकटा अंशतः चर्चा करैत छी। चलितर आ पवितर केर नाकढेकल बहिन रिताक वियाह जाहि वर सँ सस्ते मे निमरजना भ जाईछ से योग्यजोरीक नहीं चुनाव केनै केतेक विपती मेँ रीता परैत छैक ,तकर वानगी पाठक केँ देखवा में अबैत छैक। पारिबारिक ह्रास आ स्वयं मात्री प्रधानता के देखेवामे रीताक चरित चित्रण जीवन्तता पूर्वक कयल गेल अछि जे पाठक कँ अद्योपरान्त कथा सँ बान्हने रहैत अछि। जखन वृद्धा अवस्था में रीताक दूनू जौवां बेटा शहरी जीवन अपनाबैत रुग्न परिस्थितियोमे हुनक तकतिहान करय सँ बिमुख होय छैक तँ मायक सजल हृदय विदिर्ण भ सामाजिक आशके वाट ताकैत छैक । अपने गाय महीस आ जगह जमीन केंद्र दशनामामे दैत दस समाजे सँ आगू अपने जीवन निर्वाह होयवके वाट खोललीह । सामाजिक लोकके लगहैर गाए महींस सं दुध आपूर्ति करेगा अबि रहल छलील, तेँ हुनक चर्चित नाम दुधबेचनी पड़ि गेलैक । ओना बियाहक बोदध सँ श्वसुर हीरालाल दुनू प्राणीक मुइला पर आ मतिछीनू पथिक असमयिक निधन केर बाद 1954मेँ ओही नारेदीगर प्रान्तर में कोशी नदिक भिषण बाढि सँ सबुटा ठाठबाठ झहैर गेल रहैक, गहना आ गया दामी बौस्त बेचकए अबला मसोमात रीता दुनू बौआ केँ दरभंगा राखि पढेबा में सामर्थ भेलीह।कथाक नब सन्देश के जे नईका पीढी गमैया जीवनसँ पलायनवादी भ नगर पर भार बनेने आधुनिक कहबैत अछि, एहि पोथीक गामक गाछी ,कमतिया हवेली ,घुमि गाम चलू ,वीपैत ,झंझाइटिक जैर शिनुरया आमक गाछ ,जरैन ,जेहन पाठने पढ़ल पुता अपने सिर विषय कोलहुक सुचा करूटेल गोदानक गाय घुमि घर आयल आशीर्वाद आ ई केकर दोख शीर्षक मेँ ग्राम्य जिबनक रोचकता सँ भरल छैक, जे पाठक वीनू पढ़ने नय रहत।

 

Imageलालदेव कामत
गाँव- नौआबाखर (घोघरडीहा)
7631390761

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