बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी गुरुदेव स्व० डा० कमलकांत झा

Kamal Kant Jha

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी गुरुदेव स्व० डा० कमलकांत झा

मधुबनी जिलांतर्गत कलुआही प्रखंड स्थित हरिपुर डीह टोल मे २९ मार्च १९४३क जन्म लेनिहार डॉ. कमलकांत झा मूलरूप सबाल स्वयंसेवक छलैथमातृभाषा मैथिलीक संगहि राष्ट्रभाषा हिंदी केर लेखन क्षेत्रमे सेहो पूर्ण तन्मयताक संग साहित्य सृजन कयलनि। पिता पं. वीरेश्वर झा आ माता तारा देवी बच्चहिमे हिनकर संग छोड़ि देने रहथि। तेँ हिनक प्रारंभिक शिक्षा लोहा गाममे भेल छलनि।

डा. साहेब अपन लेखन यात्रा साल १९६२ सँ प्रारंभ कयलनि। हिनकर पहिल पुस्तक मैथिली नाटक ‘घटकैती’ छल, जे वर्ष १९६५ मे प्रकाशित भेल। सरल शब्दमे भावपूर्ण लेखन शैली केर कारण हुनक ई पुस्तक काफी लोकप्रिय भेल। पहिले पोथीकें भेटल अप्रत्याशित लोकप्रियतासँ हुनका लेखन केर क्षेत्रमे आगू बढबाक अभूतपूर्व उत्साह केर संचार भेल। मैथिलीमे हुनकर करीब दू दर्जन पुस्तक प्रकाशित छनि। जाहिमे चारि टा नाटक, दू टा कविता संग्रह, तीन टा कथा संग्रह, दू टा यात्रा संस्मरण आ मैथिली लोकोक्ति पर तीन पुस्तक शामिल अछि। मैथिली साहित्य जगतमे हुनका मैथिली मुहावरा आ लोकोक्ति केर विशेषज्ञक रूपमे सेहो जानल जाइत अछि। ओ एकटा उत्कृष्ट साहित्यकार होयबाक संगहि मैथिलीक प्रतिष्ठित शिक्षक सेहो छलाह। वर्ष १९६५ मे ओ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय केर अंगीभूत इकाई डीबी कॉलेज, जयनगरमे व्याख्याता केर रूपमे अपन शिक्षण यात्राक शुरुआत कयलनि। साल १९८२ मे उपाचार्य बनलाह आ १९८७ मे मैथिली विषयक प्राचार्यक पद पर प्रोन्नत भेलाह आ एक अप्रैल २००३ कें डीबी कॉलेज सँ सेवानिवृत्त भेलाह। एकर बाद जयनगरमे रहैत लेखन आ सामाजिक कार्यमे विशेष रूपसँ सक्रिय भेलाह। १९८३संडी०वी०कालेजकेवार्षिकपत्रिका‘अंकुर ’केमैंथिलीप्रभागक प्रधानसंपादकरहिओएहिपत्रिकाकेऊच्चताप्रदानकेलखिन! ओनाकतेकोराष्ट्रीय,राज्यस्तरीयदैनिक,साप्ताहिक, मासिकआवार्षिकपत्रपत्रिकाजेनाकिराष्ट्रधर्म, ‘पांचजन्यआदिमेंनिरंतरहुनकरलेखिनिरहैतछल ! ओकतेकोनेपालीसाहित्यवग्रन्थआदिकेमैंथिलीअनुवादकैलैनि! आर्यकुमारपुस्तकालयजयनगरमेंप्रत्येकपुर्णिमाककाव्यगोष्ठिकआयोजनहिनकेप्रभारमेंहोयतछल!हमहुकतेकोपुर्णिमामेंओहिकाव्यपाठमेंसहभागीबनलौं !

हमराहिनकासंपहिलेभेंट१९८१मेंडी०बी०कालेजजयनगरमेंभेलछल,जखनहम११वींमेंप्रवेशलेनेरही ! शांत,आकर्षकव्यक्तित्व, मिलनसार,सहजआमृदभाषीआदिसओतप्रोतहोमयकेकारणहमराहुनकाबीचआपकताप्रगाढह़ोइतगेलआहमहुजथाशक्तिमैंथिलीमिथिलासाहित्यआसमाजकेकाजमेरमयलगलुं४२ वर्षसंहमसततहिनकरसंपर्कमेंछलौं ! जखनदूरभाषसर्वसामान्यलगनैरहैतखन हमसबपत्राचारकेमाध्यमसंविचारकआदानप्रदानकरि ! २०१६ई०में‘गाछरुसल अछि’ मैंथिलीकथासंग्रहप्रकाशितभेल! एकरविमोचनदिवाकथागोष्टीअंतरराष्ट्रीयमैंथिलीपरिषदद्वाराककरौलमेंमनाओलगेलछल !हमएहिकार्यक्रममेंसहभागीरही! एहिरचनालेलहुनकाभारतसरकारद्वारा२०२०मेंसाहित्यअकादेमीपुरस्कारसंसम्मानितकैलगेलैन ! हमरसोचवाअछिजेएखनतकहुनकापद्मश्रीससम्मानितकयदेवाकचाहीछल !१९७४मेंईलोकनायकजय प्रकाशनारायणकजनगणनाआन्दोलनमेंपुरातनमनधनसंलागलरहैथ ! तीनमहीनाधरिकेन्द्रियकारागार,हजारीबागजेलमेंरहपरलैन

मैथिली केर अलावा हिंदीमे सेहो हिनकर एक जोड़ी पुस्तक प्रकाशित भऽ चुकल अछि। एहिमे एकटा उपन्यास ‘बिखरती रही चांदनी’ आ एकटा शोध निबंध ‘मिथिला गौरवशालिनी’ शामिल अछि। अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद (भारत-नेपाल) केर केंद्रीय अध्यक्षक रूपमे हुनक योगदान सदति सराहनीय आ अनुकरणीय बनल रहत।

सबदिनमिथिलामैंथिली,समाज,राष्ट्रसेवामेंलीनरहला ! मैथिलीकेसंविधानकेअष्टमसूचिमेंनामांकनलेलकतेकोधरनादेलनि!
मैथिली भाषा आंदोलनमे शुरुआती समयसँ सक्रिय रहलआदरणीय कमलाकांत बाबू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघसँ सेहो आजीवन जुड़ल रहलाह। राष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघमधुबनीजीलाकसंघचालक४२वर्षतकछलैथ !हुनकर खासियत रहनि जे संघक प्रचार लेल ओ जतय-जतय गेलाह, ओतय-ओतय मैथिलीक प्रचार-प्रसार सेहो खूब बढ़ि चढ़ि कऽ कयलनि।आदरणीयडा०धनाकरठाकुरआअन्यसहयोगी केमाध्यमसंमिथिलामैंथिलीकेइतिहासआसांस्कृतिकमिथिला कमानचित्रकेअंतर्राष्ट्रीयमैथिलीपरिषदकेबैनरतलेनेपालआभारतकमिथिलाकेगामे गामपहुँचाबैमेंलागलछलैथ !विगत२०२३मेंहमरगामकालिकापूरमेंअंतर्राष्ट्रीयमैथिलीपरिषदकेकार्यशालाछल, जाहिमेंहमग्रामिणसब डा०कमलकांतझाआडा०धनाकर ठाकुरदुनुमहानमहानुभावकेअद्भुतज्ञानसपुन: प्रकाशितभेलरहि!हुनकर गामक हरिपुर वासी उपेन्द्रनाथ झा व्यासकें करीब ५० साल पहिले साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छलनि। यानी हरिपुरडिहटोल गामक डा. कमलाकांत झा एहन दोसर लेखक भेलाह जिनका प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल।विगत३०मईवृहस्पतिवार,ज्येष्ठकृष्णपक्षअष्टमीकईमिथिलाकेदीप,भारतकेराजधानीदिल्लीमेंअखिलभारतीयआयुर्विज्ञानसंस्थानमेंउपचारकेक्रममें९१वर्षकअवस्थामेंपरमनिर्वाणमेंचलिगेलैथ

मिथिलाराज्यकसपनाहुनकजीवनकालमेंसंभवनै भसकल ! आउहमसब संकल्पकरिजेसकारात्मकप्रजातांत्रिकजन आंदोलनकेमाध्यमसंभारतसरकारपरदबावबनाबिजेयथाशीघ्र मिथिलाराज्यबनै,जेहुनकरवास्तविकश्रद्धांजलिहेतैन! हुनकरक्षतिपूर्तिअसंभव !एहिजगतमेंजन्म– मृत्युएकनिरंतरप्रक्रियाछैजाहिपरहमराआंहा केवशनै ! शास्त्रमेंवर्णितश्लोककेमाध्यमसंहमरश्रद्धांजलि:-

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । न चानं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥

“ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥”

 

ॐशान्ति,शान्तिशान्ति:

नवोनाथझा‘विवेक ’

ग्रामपोस्ट कालिकापुर

प्रखंड कलुआही,भाया खजौली

जिला मधुबनी,मिथिला८४७२२८

दूरभाष:  ७३५२२०३२८४

 

 

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