अपन गामक कला के पुनर्जीवन देबय में लागल छथि परसौनी, मधुबनी के शरद कुमार

अपन गामक कला के पुनर्जीवन देबय में लागल छथि परसौनी, मधुबनी के शरद कुमार

देखबा योग्य अछि “आर्ट क्लब” में नीरु के सुजनी, चन्दा के लिखिया आ प्रियंका के गुडिया

पटना । नलिनी ठाकुर
मजबूत इच्छाशक्ति संग, लीक सँ हटि किछु बेहतर करबाक चाहत आ कठिनाई सँ लड्बाक लेल धैर्य रहय त असंभव के संभव बनाकय देखाओल जा सकैत अछि, आ अहां अप्रत्याशित उप्लब्धि के संग आन के गौरवान्वित कय सकय छी ।

एहने में एक छथि युवा मूर्तिकार एवं शिल्प-विशेषज्ञ ‘शरद कुमार’ , जे सम्प्रति सगुना मोड के नजदीक “द आर्ट क्लब” स्थापित कय अपन परिकल्पना के सकार करबाक हेतु समर्पित छथि।
देश के महामहिम राष्ट्रपति सँ कला में विशिष्ट उपलब्धि सब लेल सम्मानित आ संगहि विदेश में अनेकों सम्मान प्राप्त कयनिहार शरद कुमार पछिला २० वर्ष सँ लागल छथि मिथिला के लुप्तप्राय सुजनी कला, लिखिया कला आ गुडिया कला के संग पारम्परिक भित्ति चित्रकला के पुन: प्रतिष्ठित करय में।
पटना के बेली रोड में सगुना मोड लग स्थित “द आर्ट क्लब” के स्टुडियो में एहि दिशा में शरद कुमार के अद्यावधि उपलब्धि सबकें देखिकय कियो स्वत: अनुभव कय सकैत अछि कि हिनक कलात्मक सौन्दर्यबोध की अछि आ ओहि के अनुरुप हिनक कर्तव्य कर्म की छन्हि?

सुजनी कला में पारंगत नीरु देवी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षिका छथि आ पटना जिलाक अथमलगोला लग कें जमालपुर बीघा के रहयवाली छथि। नीरु देवीक सुजनी कला में कारीगरीक महीनीं के बारे में कहैत शरद कुमार कहय छथि की ई एहि कला मे बहुत काज कयने छथि आ एहि कला के पुनर्जीवित करबा में सन्तोषजनक उपलब्धि प्राप्त भेल अछि आ एक प्रदर्शनी व्यापक स्तर पर देश-विदेश में आयोजन करबाक योजना पर काज चलि रहल अछि।

नीरु देवीक सुपुत्री सुश्री प्रियंका कपडा के गुडिया कला के परिष्क्रित रूप में तैयार कय रहल छथि। मिथिला में ई कला बहुत लोकप्रिय रहल अछि। कपडाक गुडिया, चिडिया, खिलौना नवजात शिशु आ बच्चा लोकनि के मनपसंद चीज होइत छल। आई ई गुडिया कला प्राय: लुप्तप्राय भेल जा रहल अछि जकरा फेर सँ नव रूप में स्थापित करबाक काज कय रहल छथि प्रियंका शरद जीक मार्गदर्शन में।
प्रियंका अपन कलाक निर्माण में नव-पुरान सूती वस्त्र, रूई आ कतरन, रंगीन धागा, केश लेल कारी सूती धागा, साज-श्रिंगार लेल मोती आ लैसेज के उपयोग करय छथि। प्रियंका गुडिया कलाक्रिति में गुड्डा-गुडिया संगे हाथी, घोडा, गाय, बकरी, चिडिया, धार्मिक प्रतीक चिह्न के शताधिक कलाक्रिति बना चुकल छथि। गुडिया कलाक्रितिक ई नज़ारा “द आर्ट क्लब” के विशेष आकर्षण बनल अछि।

गोरापट्टी, दरभंगाक चन्दा लाभ आर्ट क्लब में पारम्परिक लिखिया कला के जीवंत करय लेल समर्पित छथि। मध्यमा अंगुल प्रमाण कनची में रुई लपेटकय पारंपरिक रंग सँ पारंपरिक लिखिया कला के पुनर्जीवित कारबा में लागल छथि।

एहि सब कला के पुनर्स्थापित आ पुनर्जीवित करबाक संग-संग कला सबलेल अलग-अलग प्रकार के कगज के निर्माण आ संग्रह सेहो शरद कुमार के कलात्मक विशेषता छन्हि।

अपन गौरवशाली लोक कला के संरक्षण आ संवर्धन के प्रति उदार आ स्वाभिमानी शरद कुमार के एहि सुजनी कला, लिखिया कला, गुडिया कला के क्षेत्र में एतेक व्यापक रूप में काज करबाक बादो सरकार आ शासन स्तर पर कोनो आर्थिक सहयोग नहिं भेट रहल छन्हि। एहि सबके बावजूद शरद कुमार के विश्वास छन्हि की जँ उद्देश्य नीक अछि त आई ने कालि सफलता अवश्य भेटत।

(दिनांक १३ मार्च २०२० “आज दैनिक” में प्रकाशित लेख सँ साभार)

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