मैथिली भाषा-साहित्यक अपूरणीय क्षति: पं.चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ नहि रहलाह

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मैथिली भाषा-साहित्यक अपूरणीय क्षति:
पं.चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ नहि रहलाह।
(02 मार्च,1925 – 01 अप्रैल,2021)
मैथिली साहित्य के पुरोधा कही वा मिथिला आ मैथिली में राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रणेता आ सबसँ पैघ पोषक के रुप में पं चन्द्रनाथ मिश्र अमर के नाम लेल जाईत रहत। आई मिथिला में सशक्त राष्ट्रवादी विचारधारा के युवाकाल देखैत अपन मिथिला में चारूकात चमकैत लहलहाईत धर्मध्वजा देखैत आई ‘अमरजी’ गोलोक प्रस्थान कयलाह।
हमरा सन छोट कार्यकर्ता लग हुनक बेसी सत्संग त नहि अछि मुदा हमसब ई सौभाग्य बुझय छी जे हुनक आशीर्वाद आ प्रेरणा सँ मिथिला में एकटा प्रारंभ करबाक दायित्व भेटल छल। 2018 में दरभंगा एलाक उपरांत मैथिली साहित्य में राष्ट्रवादी लेखन के प्रसार हेतु एकटा मंच के आवश्यकता बुझला पर  मैथिल मंच के संयोजन में सम्पूर्ण दरभंगा के मिथिला-मैथिली अभियानीलोकनि सँ विचार लय बाबूजीक पुस्तकालय के निर्माण कयल गेल छल जहिमे स्व पं चन्द्रनाथ मिश्र अमर जी अपना हाथ सँ अपन पुस्तक  पुस्तकालय हेतु प्रदान कयने छलाह। संगहि हमरा ई दायित्व देने छलाह जे एहिके संचालन आ संयोजन करबाक अछि।
अपन क्षमतानुसार देल दायित्व के निर्वहन करय छलौं मुदा मोन में कचोट रहिगेल जे अपन काज हुनका कम सँ कम एकबेर देखा सकितौं आ आगाक मार्गदर्शन लैतौं।
लिखबाक लेल शब्द नहि भेटि रहल अछि ……. एखन बस एतबे……..चाहे जेना होई…..जे करय पड़य……..अपन दायित्व लेल क्षमतानुसार शत प्रतिशत योगदान दैत रहब।
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जय मिथिला
जय जय मैथिल
www.maithilmanch.in


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