22 सं 24 नवंबर धरि होयत तीन दिवसीय समारोह, साहित्य, संगीत आ कलाक बहत त्रिवेणी

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दरभंगा । वंशिका सिंह

​मिथिलाक महान विभूति सभ कें यथोचित सम्मान देबाक आ आबयवला पीढ़ी कें हुनकर कृतित्व सं परिचित करयबाक उद्देश्य सं प्रत्येक बरख साहित्यिक आ सांस्कृतिक महाकुंभ रूप मे आयोजित होइत मिथिला विभूति पर्व समारोह मिथिला-मैथिलीक उत्कर्षक जीवंत प्रतीक अछि। ई बात विद्यापति सेवासंस्थानक महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू रविदिन 54म मिथिला विभूति पर्व समारोहक आयोजनसमितिक समीक्षा बैसार मे कहलनि। ओ कहलनि जे एहि बरख 22 सं 24 नवंबर धरि आयोजित होमयवला समारोह मे मिथिलाक साहित्यिक आ सांस्कृतिक विरासत कें संरक्षित आ संवर्धित करबाक संगहि मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबाक मांग पर विशेष जोर रहत।
​बैसार मे मिथिला चित्रकला आ पारंपरिक व्यंजनक प्रदर्शनीक अतिरिक्त साहित्य अकादमी, दिल्ली आ मैथिली अकादमी, पटनाक सौजन्य सं तीनू दिन आकर्षक पुस्तक मेला लगेबाक निर्णय लेल गेल। डॉ. बैजू कहलनि जे एहि बेर नव पीढ़ीक कलाकार आ कवि सभ कें बेसी अवसर देल जायत। समारोहक पहिल आ दोसर दिन विद्यापति गीत-संगीत पर विशेष ध्यान देल जायत।
​मीडिया संयोजक डॉ. प्रवीण कुमार झा कहलनि जे संस्थानक मुखपत्र अर्पणक प्रकाशन लेल संपादक डॉ. महेंद्र नारायण राम आ हुनकर संयुक्त संपादन मे आलेखसभक संकलन युद्धस्तर पर चलि रहल अछि। वरिष्ठ कवि आ गीतकार डॉ. चंद्रमणि झाक संयोजन तथा डॉ. प्रवीण कुमार झाक सह-संयोजन मे कवि सम्मेलन कें भव्य बनेबाक लेल देशक विभिन्न भाग सं मैथिली कवि-कवयित्री सभक सूची आखिरी रूप देल जा रहल अछि।

​शोभायात्रा संयोजक विनोद कुमार झा शोभायात्राक तैयारीक जानकारी देलनि। आशीषचौधरी युवा सभ कें कार्यक्रम सं सीधा जोड़बाक लेल अपन आ बालेंदु झाक संयुक्त संयोजन मे चलि रहलतैयारीक जानकारी देलनि। मणिभूषण राजू अंतर्राष्ट्रीय मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिताक विषय मे विस्तार सं बतौलनि।
​मैथिली अकादमीक पूर्व अध्यक्ष पं. कमलाकांत झा मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक मान्यता नहि भेटबाक स्थिति पर चिंता व्यक्त कयलनि। ओ कहलनि जे जनक, जानकी आ कवि कोकिल विद्यापतिक भाषा मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक सूची मे शामिल नहि कयल जेबाक निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण अछि। एहि मान्यता सं मिथिला आ बिहारक भाषाई विरासत कें सम्मान भेटत आ मैथिलीक प्राचीन ग्रंथ सभ मेनिहित ज्ञान विश्वभरि मे पहुंचत।
​अध्यक्षीय संबोधन मे संस्थानक अध्यक्ष आ पूर्व कुलपति प्रो. शशिनाथझा कहलनि जे मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबाक संबंध मे राज्य सरकार द्वारा आवश्यक प्रक्रियाअंतर्गत विस्तृत प्रतिवेदन केंद्र सरकार कें देल गेलाक बादो मान्यता नहि भेटब आश्चर्यजनक अछि। ओमैथिलीक अस्मिता आ साहित्यिक विकास सं जुड़ल एहि मुद्दा पर सभ मैथिलीसेवी संगठन कें एक मंच पर आबि एकजुटताक वातावरण बनेबाक आह्वान कयलनि।

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