मिथिला में माछ, रोजगार के सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि :: :: लालदेव कामत

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मिथिला में माछ, रोजगार के सर्वसुलभ साधन भय सकैत अछि :: :: लालदेव कामत

मिथिलामें पान-माछ, मौध-मखान केर महिमामंडित चर्चा परस्पर होइते रहैछ। माछ तँ दशावतारमें सँ एक छैक, तेँ वैष्णबजन साकठकेर अपेक्षा माछसँ दुरे रहैत अछि। हिन्दू समाज छुतका (अशौच) पड़ला पर माछ बारने रहैछ। 2001 ई• में हम माछ पालन केर नव विषय बूझय लेल महाराष्ट्रक रत्नागिरी जिलान्तर्गत आरेगाँव (डापोली) गेल छलहूँ। खाड़ाजल आ मीठगर जलमे माछक अलग-अलग प्रजातिक निकसँ पालनपोषण कयल जाइत छैक। प्राउन टाईगर पर हम आनदिन कहियो गप्प करब। एखन हम अपना माँटिपानि पर एक पोखरिमे छह तरहक माछक थर पोसि सकैत छी, ताहि सम्वन्ध में वृहद रूपे चर्च करैत छी। मिश्रीत माछ पालन तकनीकमे रौह, भाकुर (कतला, रौह मृगल) देशीक संग-संग विदेशी कार्प यथा-: सिल्वर, ग्रास आ कौमन एकेसंग पोसल जाइत अछि। भारतीय मेजरकार्प केर स्पाॅन्ज बा छबरा बच्चा जकर पालन मात्रे तीन तरहक जेना रोह भाकुर आ नैनी टाक परमारागत रुपे होयत अबैत रहय, से आब ओहिक संग-संग तीनू तरहक विदेशी कार्प सेहो हुअय लगल अछि। छ: तरहक पोसल गेल माछक रहन-सहन आ खानपीन अलग-अलग परत में ओईछ। एक दोसराक भक्षण तत्व सदा सर्वदा पृथके रहैछ। माछक जीरा खसाबै सँ पूर्व पोखरि वा जलाशय सँ जलीय पौधा जेनाकि कुमहि, केचली, मलकोका, कमल पुरनीपात (भैंट) आ करमी लती-मखान आ सिंगरहार, लीली छानिके निकालि साफ राखक होयत। हाईद्रीला, दुईब, नाजा, लैम्ना आ बर्सिम घास सँ विदेशी कार्प अपन चारा चरौर करैत य। पुरक अहारमे पहिलखेप एक एकड़ जल क्षेत्र लेल पशु गोबर 800 क्विंटल तकरबाद मासेमास 4 क्विंटल दैत रहबाक छैक। यूरीया 10 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 8 किलो आ पोटाश 2 किलो दैत रहबाक होयत। पहिने जैविक खाद्य तकर 15 दिन वाद उर्वरक देलासंता जौ जल हरियर मचोर भ जाय तँ खाद देब रोकि देना चाही।
पोखरि सुखल होयतँ जोत करेलाक बाद भरकलचून आ सरिसो, मुमफली-मौहक खैर गोबरक कम्पोष्ट खाद देलाक बाद पानि बर्साक वा पम्पसिट मशीन सँ भरल जाय। नम्हर जलग्रहण क्षेत्र जे सुखय नहिँ, ताहि भरल पोखरिमे 1000 किग्रा• प्रति एकड़ खैर देल जाय। आ पहिले सँ विद्यमान अवांक्षित माछ यथा टेंगरा-पोठी, चन्ना-चेलबा गरई, सौरा बुआरी, सिंधी-मांगुर, कांटी जालसँ निकालि लीअ, सेहो हिस्सा पाउत आ जीराकेँ सेहो भक्षण करत। जल जौं कनियौ क्षारीय होअय तँ 100 किग्रा• प्रति एकड़ दर सँ मिजहायल चुन जलमे छिटल जायबाक चाही। एक अंगुरीक आकार (4 सँ 6 इंची) केर जीरा 2000 प्रति एकड़ एहि अनुपात में संचल कयल जाय-: 300 नंग 300 भाकुर, नैनी, सिल्वरकार्प आ ग्रासकार्प देल जाय संगहि 400 नंग 400 रेहू आ काॅमन कार्प पालन कयल जाय। माछक एहिसँ नीक बृद्धि आ रोग सँ बचाउ स्वत: भ जायत झटदय बढ़य लेल पूरक अहरामे सरिसबक खैर, चाउरक गुड़ा भोर-साँझ देल जाय। डेढ़ किलो पहिले माससँ शुरु करबतँ साल लगैत-लगैत पौन दस किलोधरि बढ़िबैत आबि जाऊ।दुइबघास मकईके पतासी आ हाईड्रीला देबाक अछि। पूरक चारामे मेंथी भुइज कए दोखैर ली ओहि मेँ 1 प्रतिशत एग्रीमीन फेंट कए माछके परोसू तँ बढ़ बरहत। सालभरिमे 1 किग्रा• फरी भ’ जायत तँ शिकरमाही क’ निकालि सकैत छी। बजार भाव माछक देखकए बा लग्न में आढ़त अयला पर प्रति एकड़ 1000 सँ 1500 किग्रा• उत्पादीत माछ बेच सकैत छी, किछु शिक्षित बेरोजगार युवक हमरा संगे सिंहेश्वर स्थान (मधेपुरा) पशुमेलामे माछ पालनक विशेष जानकारी लेलनि। हमतँ छोट तलाब सेहो बनेलहूँ, जाहिमे एहि प्रजातिक माछक बढ़बार कम भेल, तेँ बादमें थाई मांगुर आ अमेरिकन कबई पालनक काज सेहो 1990 केर दशक मे केने छलहूँ। नामगर बेशी चौड़गर कम बाला पैघ पोखरिमें एहि तरहक मांछ पालन कय आर्थिक बढ़ोतरी कए सकैत छी। एहि संदर्भ 45- जिप• घोघरडीहा दक्षिण क्षेत्रक सदस्य आ जिला उत्पादन समितिक सदस्य श्रीमती मंजू देवी सँ भेंट करैत कारोबारी लेल सरकारी ऋण मुहैया कोन तरहे भ’ रहल छैक, से जनबाक चेष्टा केलहूँ। घोघरडीहा प्रखंड आत्मा• कमिटिक अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जी सँ सेहो माछ पालनक दिश बेरोजगारक प्रशिक्षण संवंधमें सम्पर्क स्थापित कयल। आब जौं माछ पौसब केर शोख अछि तँ बड़का टबमें सेहो पोसनाय केर विधि विकसित भेल हन। एहि बाबत जिला मत्स्य, मुख्य पदा• आ कार्यपालक पदाधिकारी मदैत करताह। मनरेगा• सँ नीजी भूमीमें पोखरिक निर्माण करब अनलाॅक समयमे सार्थक डेग बढ़ायब होयत। मत्स्य पालन लेल बिहार सरकार अति पिछड़ा तबका केँ 90% ऋण में अनुदानक घोषणा भेलनि अछि।

 

-लालदेव कामत
(समाजकर्मी)

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