“चिड़चिड़ी” :: राजकुमार झा, सझुआर

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“चिड़चिड़ी”
– राजकुमार झा, सझुआर ।
– ३१ मई, २०२० (रविदिन)
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प्रकृति अपन आँचरिमे एक सँ एक उपयोगी वनस्पति समेटि मनुक्खके विलक्षण उपहार दS कृतार्थ करैत आबि रहल अछि । पूर्व समयमे चर्मरोगक घरेलू उपचार एहि वनस्पति द्वारा होइत छल । ताहि समय रूपया-पैसाक ओतेक प्रचुरता नहि छलैक । छोट-छीन घावक घरेलू उपचार जंगल-झाड़ वा वन-उपवनमे स्वतः उगल वनस्पति केर माध्यमें सुगमतापूर्वक कयल जाइत छल । ग्रामीण परिवेशमे रहनिहार बहुसंख्यक समाज बड्ड बेशी लाभान्वित होइत छलाह । जखन बड्ड बेशी तबीयत खराब होइत छल तखनहिं डॉक्टर-वैद्यक दरकार, अनुभव कयल जाइत छल । साधारणतः दवाई-दारूक खगताक परिपूर्ति घरेलू उपचार केर माध्यमें सफलतापूर्वक भS जाइत छलैक । आई चर्चा करब एक एहेन जंगली वनस्पतिके, जकर नाम थिकैक “चिड़चिड़ी ।”

अपने अनुभव करैत होयब जखन गामक जंगल-झाड़, वन-उपवन वा रस्ताक कातमे घुमबाक अवसर भेटल होयत, चिड़चिड़ीक छोट-छोट सुन्दर झाड़ अनायास अपना दिशि ध्यान आकृष्ट करैत होयत । देखबामे सुन्दर एवम् छोट-छोट कंटीली फड़ल फSर वा बीया अपना भीतर घरेलू उपचारक गुणसँ परिपूर्ण रहैत अछि । पहिने धिया-पूताके पैरमे ठर्रा घाव भS जाइत छलैक । जकर घरेलू आ औषधिए उपचार चिड़चिड़ीक बीयासँ दाई-माई करैत छलीह । उपचारक विधान बेशी भरिगर वा खर्चीला सेहो नहि छल । चिड़चिड़ीक झाड़सँ ओकर बीया तोड़ि रौदमे सुखायल जाइत छल । आटा जकाँ मेही सँ पीसीके नारियल तेलमे बढ़िया जकाँ मिलाय घाव पर लगायल जाइत छल । दू-चारि चोटमे घाव जड़ि समेत निपत्ता भS जाइत छल । एखनहुँ बहुत बेशी संख्यामे चिड़चिड़ीक झाड़ उपलब्ध अछि । मुदा देशी उपचारक प्रति उदासीनता एहि झाड़क उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह ठाढ़ कS देने अछि ।

घरेलू उपचारमे वनस्पतिक योगदान, प्रकृतिक कृपा-प्रसादात सुलभ भS पबैत अछि । मुदा आब स्थिति पूर्णतः विपरीत अछि । गाममे छी घूमबाक क्रममे एहि विलक्षण झाड़ दिशि नजरि चलि गेल । धियापूतामे एहि झाड़क बीयामे विद्यमान औषधिए गुण देखने रहि तैं नव पीढ़ीक जानकारी हेतु अपन अल्प ज्ञान केर माध्यमें रखबाक प्रयास कयलौं । जिनका नजरिमे एहि झाड़मे जँ आओरो उपयोगी गुण होइक, कृपया अवगत करेबाक कष्ट करी संगहिं समाजक समक्ष रखबाक प्रयास करी । जय श्री हरि ।

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