“हारि नहि मानब” पोथी समीक्षा :: लालदेव कामत

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पोथी समीक्षा
हारि नहि मानव मूलहिंदी लेखक अटल बिहारी वाजपेयी, मैथिली पद अनुवाद- डॉक्टर चंद्रमणि झा सौजन्य प्रकाशक- ललित कुमार झा- पौहद्दी (दरभंगा) प्रकाशक- नवारम्भ-मधुबनी वार्ड नंबर 2 विवेकपुरम (अजीत आजाद) प्रकाशन वर्ष 2018 रंगील कोभर कूटगता पोथीक मूल्य 2सय भारतीय राजनीतिक आदर्श पुरुष भूतपूर्व प्रधानमंत्री, अतुलनीय समन्यवादी , प्रखर राष्ट्रवादी, अपराजित कवि, धुरंधर वक्ता, उत्तमचरित्र महानायक, अजातशत्रु , मैथिलीके संवैधानिक दर्जा देनिहार , दूभागमे बँटल मिथिला कोशी महासेतु संँ जोड़निहार ब्रह्मलीन अजर- अमर भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जीके हुनकहि कविताक मैथिलीमे पद्यानुवाद कए एकटा लघु काव्यांजलिकेँ श्रधांजलि रुपे समपर्ण भेल एहि 88 पृष्टक पोथी में 88 कविताक संगे हमर अटलजी शीर्षकसँ माननीय नरेंद्र दामोदर दास मोदीक व्लाॅग सँ एकटा पाठ आ डॉक्टर चंद्रमणि झा स्वयं साभार रुपे अटल बिहारी वाजपेयी ( एक परिचय) आलेख देने छथि । डॉक्टर चंद्रमणि झांक जन्म नबादा ( बहेड़ा) जि० दरभंगा में स्व० राममुर्ति झा आ स्व० सीता देवीक घर भेलनि’। अंग्रेजीसँ एम ए रहलाक बादों ओ मैथिलीमे गीत संग्रह ‘ रहि जो हमारे गाम’ आ गीताम्बुज रचलनि संगहि निधि निवंधमे बहुतों लेख लिखने छथि । मैथिलीमे हुनक काव्य संग्रह अनामिका आ मुक्त- उन्मुक्तक अतिरिक्त कतेको विधामे दोसर तरहक पोधी मैथिली- हिन्दी आ इंग्लिशमे प्रकाशित भेल छन्हि। डाक्टर मिश्र दरभंगा समाहरणालय संं सेवा निवृत्त छथि आ वहुतो तरहक पुरस्कार अपना नामे अर्जित कयने छथि। संगीत प्रभाकर केर आब लाभ हिनका वेसारिमे भ’ रहलनि से जिनगी हिनको संगीतमय भ गलैक अछि। हिनका प्रतिभाक उपादेय वाजपेयी जी के कविता के सौष्टव आ लालित्यके हूबहू अपन मातृभाषामे उतारि, जेना जल जाहि बासन मेँ रहत; तेहने चरित्र ग्रहण करत तेनाहि पाँतिक पतियानि ओरियेलनि से अपन मोन गछैत य। कविता ससमय पाठक वर्ग लग अननाई सहजे अनुमान कए लेब जे ई केहन जीवटगर छथि। कविताक गेयात्मक भाषान्तर एहि तरहे अछि:-
आई सिन्धमे ज्वार उठल अछि
नगपति पुनि ललकारि उठल अछि
फेरो कण-कण कुरुक्षेत्र के
पाच्यजन्य हुँकारि रहल अछि
सयके-सय आधात सहनकए
जीवित हिन्दुस्तान हमर अछि
जगतक मस्तक पर रोली सन
शोभित हिन्दुस्तान हमर अछि
दुनियाँकेँ इतिहास पुछै अछि
रोम कतय यूनान कतए अछि?…………
दोसर देखु:-
मनाली नहि जइहेँ गोरी
राजाके राजमे।
जइहेँ तँ जइहेँ
उड़िकए नहि जइहेँ
अधरमे लटकबेँ
वायुद्तक जहादमे।
जइहेँ तँ इइहेँ
सनेसा ने पइहेँ
टेलीफोन बिगड़ल छै
मिर्धा महाराजमे।
एहि तरहे फेर दोसर कविता यादिकरी हुनका देखू:-
जे बरिसों सड़लाह जेलमे
यादिकरि हुनका
जे फांसी चढ़लाह खेलमे
यादिकरी हुनका’
याद करी काला पानी केँ
अंग्रेजक ओहि मनमानी केँ
केल्हूमे जुटि तेल पेरैते
यादिकरी बहिरा शासनकेँ
बमसँ थर्राइत आसन केँ
भगत सिंह, सुख देव-राजगुरु
केर आत्मोत्सर्ग पावन केँ
अन्यायी सँ लड़ी
दयाके बिनय नै करि नै अनका’
यादिकरी हुनका………….. मैथिली पाठक वर्ग केँ सब कविता उपरा उपरी रसगर लागत यद्यपि एही कवित्वमे तातस छन्द सहित मन्दाक्रान्ता, जयकारी, शार्दूलविक्रिड़िता, सवैया, रोला, षटपद, सोरठा आ दोहा-चौपाई आओर वसन्ततिलका नहिंयो रहैत मंगल कामना सँ अनुदित ई पाठ निक लागत :-
आऊ पुनः हम दिया जराबी
हिन्दू तन-मन हिन्दू जीवन
कथी गमएलौं- पओलौं जगमे
जिनगीक ढ़रय लागल साँझ
गीत नवल गाबै छी
दुधमे दरारि पड़ल
झुकि नहि सकैत छी
बाट कोन अपनाबी हम
गीत नही गबैत छी
देखू हम बढ़ले जाइत छी
सपना टुटि गेलै
आऊ मर्द नामर्द बनू
आऊ, मोनके गीरह खोली
नव गीरह लगैय
स्वतंत्रता दिवसक पुकार
अमर आगि अछि
अमर अछि गणतंत्र
जम्मूक -पुकार
कोटी चरण बढ़ि रहल
भगवा हमर गगनमे लहराइत छै
कण्ठ-कण्ठमे एक राग अछि
आबए जकर-जकर साहस हो आदि।
पोथी ‘हारि नहि मानव’ केर उपयोगिता रसिकजनमे तँ अछिये परंच नव पीढ़ि में सेहो एहि सरोकार सँ जुटबाक प्रेरणा अद्यप्रकाशित एहि मैथिली पोथी सँ होइछ । पोथी क कलेवर आकर्षक बुझाएत आ एक बेर प्रणाम करबाक मोन फेरसँ सहजे भ’ जायत से मनोवैज्ञानिक सिहरन मानस पटल पर आओत। मालाधारी हारमंस सँ बनल एहि प्रतिक पर एक पुष्प हमरो दिस सँ । एहि काव्य कृति लेल पृथक सँ परमादरणीय डॉक्टर झाजी के सेहो साधुबाद करय सँ अपना के नहि रोकि सकब । हम स्वयं शब्द विन्यासक निहितार्थ एहिमे खुब डुबकि लगेलौंह, तेँ कहब होइछ अटल जीक पवित्रनामके किछु निछाबर करैत अपना घरेलू पुस्तकालय में ई पोथी सहेजके राखब।

लालदेव कामत
स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक
7631390761

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