“मैथिली भाषा साहित्यक महान विश्लेषक – जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन” :: राजकुमार झा

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“मैथिली भाषा साहित्यक महान विश्लेषक : जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन”
“महान भाषाविद् जॉर्ज ग्रियर्सन : संक्षिप्त परिचय”
संकलित : द्वारा राजकुमार झा ।
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मैथिली भाषा-साहित्यक महान विश्लेषक एवम् भारतीय भाषाक विश्वविश्रुत भाषा वैज्ञानिक – सर्वेक्षक जॉर्ज अब्राहम ग्रिर्यसनक जन्म ०७ जनवरी, १८५१ ई० कें ग्लेनागियरी काउंटी, डबलीन, आयरलैंडमे भेलनि । हिनक पिताक नाम जॉर्ज अब्राहम रहनि । ओ ‘एक्सप्रेस’ दैनिक पत्रिकाक सह-अधिकारी एवम् महारानी विक्टोरियाक मुद्रक रहथि । हिनक मायक नाम इजाबेला रक्सटन छलनि । हिनक दुनू मातृ एवम् पितृ कुलमे सरस्वतीक आराधनाक परम्परा छल ।

ग्रियर्सनक प्रारंभिक शिक्षा सेंट बी श्रूजबरीमे भेलनि । तदनुपरांत प्रसिद्ध विद्वान प्रो० बेंजामिन हॉल केनेडीक अभिभावकत्वमे शिक्षा पाबय लगलाह । मुदा, ग्रियर्सनक शिक्षा-दीक्षामे जाहि गुरूक सबसँ बेशी प्रभाव पड़ल, से छलाह भाषाविद् प्रो० रॉबर्ट एन्टकिंसन । प्रो० एन्टकिंसन फ्रेंच, लैटिन, अंग्रेजी, रूसी, चीनी, संस्कृत, तमिल, तेलगु आदि भाषाक ज्ञाता छलाह । कोनो प्रकाण्ड भारतीय पंडित जकाँ अष्टाध्यायी पर हुनक असाधारण अधिकार छलनि । ग्रियर्सन यद्यपि गणितक छात्र छलाह, मुदा गुरूक सानिध्यसँ हिनकहुमे भाषा-साहित्यक प्रति प्रगाढ़ अभिरूचि जागि गेलनि ।

ग्रियर्सन १८७१ ई० मे इण्डियन सिविल सर्विस परीक्षा पास कयलनि । १८७३ ई० मे भारत प्रस्थान करबाक समय जखन ओ गुरूसँ आशीर्वाद लेबाक हेतु गेलाह तS ओ भारतीय भाषाक अनुसंधानक काज सौंपि देलथिन । ग्रियर्सन एकर निर्वाह जीवनपर्यन्त करैत रहलाह । ग्रियर्सन भारतमे ०१८७३ सँ १८९८ ई० धरि रहलाह । एहि दू युगक अभ्यन्तर ओ बिहार व बंगालक विभिन्न स्थान पर विभिन्न रूपमे सेवा कयलनि । एहि क्रममे ०४ दिसम्बर, १८७७ सँ १७ जुलाई, १८८० ई० धरि ओ मधुबनीमे पदस्थापित छलाह ।

मधुबनीक गिलेसन बाजार हुनकहि नाम पर अछि । एहिठाम किछु अस्वस्थ भए तीन मासक अवकाश लए जखन स्वदेश फिरलाह तS पूर्व परिचिता लूसी एलिजाबेथसँ १४ सितम्बर, १८८० ई० कें विवाह कए पुनः भारत आबि गेलाह । विवाहक समय ग्रियर्सनक आयु २९ वर्ष एवम् लूसीक आयु २६ वर्ष छलनि । १८९९ ई० मे ग्रियर्सन अपन देश वापस चलि गेलाह । जतय जीवनक शेष अवधि भारतीय भाषाक सर्वेक्षण एवम् विवेचनमे बिताओल । एहि महान भाषक देहावसान ०८ मार्च, १९४१ ई० मे भेलनि । ग्रियर्सनकें यद्यपि संतान सुख नहि प्राप्त भेलनि, किन्तु भारतीय भाषाक हेतु ओ जे काज कए गेल छथि, से कोटि-कोटि भारतवासी युग-युग धरि उचरैत रहत ।

मिथिलाक लोक, भाषा-साहित्य एवम् संस्कृतिक पहिल परिचय ग्रियर्सनके एकासी सालक (१८७३-१८७४) दुर्भिक्षक समयमे भेलनि जखन अकाल पीड़ित लोकक सहायता-कार्यमे ओ लगाओल गेल छलाह । मुदा जखन हुनका पदस्थापन (०४ दिसम्बर, १८८० ई०) मधुबनीमे भेलनि तS मिथिला एवम् मैथिलकें निकटसँ देखबाक आ गुनबाक पर्याप्त अवसर भेटलनि एवम् ओहि अवसरक सदुपयोग कयलनि । मधुबनी प्रवास अथवा तकर बादक अवधिमे मैथिली भाषा एवम् साहित्यक क्षेत्रमे ग्रियर्सनक अवदानकें मुख्यतः दू कोटिमे राखि सकैत छी ।

१) मैथिलीक सम्मानजनक सरकारी मान्यताक लेल जनमत तैयार करब, तथा

२) मैथिली भाषा-साहित्यक संकलन, सम्पादन, विवेचन एवम् प्रकाशन ।

ग्रियर्सन इजलासमे बैसैत छलाह । वादी-प्रतिवादीके सुनैत छलाह । ओ सभ मैथिली अथवा अन्य स्थानीय भाषाक अतिरिक्त किछु बाजि नहि सकैत छल । जे कियो हिन्दी बजबाक प्रयासो करैत छल, से मैथिलिए भS जाइत छलैक । अपन एहि अनुभवक आधार पर ग्रियर्सनक दृढ़ मत छल जे कचहरी अथवा स्कूलमे स्थानीय भाषा माध्यम बनय । ओ ई मानैत छलाह जे बिहारी भाषाकें सरकारी स्तर पर मान्यता दिआएब बिना सरकारक सहायताक बिनु संभव नहि अछि । हुनकर स्पष्ट अभिमत छल जे कोनो जाति अथवा राष्ट्र संसद द्वारा अधिनियम बनबाए भाषा नहि बदलि सकैत अछि । ग्रियर्सनसँ पूर्वक जे केओ पाश्चात्य विद्वान भेलाह, मैथिलीके एक स्वतंत्र भाषा नहि मानि, हिन्दीक अन्तर्गत रखबाक पक्षधर छलाह । ग्रियर्सन पहिल व्यक्ति भेलाह जे भाषावैज्ञानिक तथ्यक आधार पर मैथिलीकें एक स्वतंत्र भाषाक रूपमे स्थापित कयलनि ।अपन एहि मतक स्थापनाक लेल ओ अनेकों लेख एवम् पोथी लिखलनि । लोकक विरोधक उत्तर देलनि । मैथिलीकें एक स्वतंत्र भाषा मनबाक लेल ग्रियर्सनक राजनीतिक स्तर पर पर्याप्त विरोध भेल आ औखन साम्राज्यवादी मानसिकताक लोकके ई अरघैत नहि छन्हि जे मैथिली भारोपीय आर्यभाषाक मागधी अपभ्रंशक प्राच्य समूहक एक स्वतंत्र भाषा थिक । ग्रियर्सन मैथिली एवम् मैथिलीक विभिन्न भाषिकाक व्याकरण लेखनक अतिरिक्त मैथलीक शिष्ट आर लोक दुनू साहित्यक संकलन, अनुवाद, विवेचन, सम्पादन आओर प्रकाशन कयने छथि । मैथिलीक कतिपय साहित्यकारक प्रसंग अनुसंधान कए साहित्यक विवेचन कयलनि । लोक साहित्य क्षेत्रमे हुनक प्रमुख संकलन-सम्पादन अछि – गीत दीनाभद्रीक ओ गीत नेबारक तथा सलहेस । ओ मनबोधक हरिवंश (कृष्णजन्म) तथा उमापतिक पारिजातहरणक संकलन, अनुवाद एवम् सम्पादनक संग ओहिमे प्रयुक्त समस्त शब्दक सूचिकरण कयलनि । मिथिलाक कतेको कविक परिचय संकलित कयलनि । विद्यापतिक समसामयिक कवि एवम् विसपी ग्रामदानक प्रसंगक अनुवाद कयलनि । जीबछ मिश्र लिखित उपन्यास ‘रामेश्वर’क समीक्षा लिखलनि । फतुरी लालक अकाली गीतसँ लोकके परिचित करौलनि । विद्यापतिक ‘पुरूष-परीक्षा’क अनुवाद कयलनि । “मैथिली क्रेस्टोमैथी” एवम् “ट्वेन्टी वन वैष्णव हिम्स’क” टंकन करबौलनि । बिहार पिजंट लाइफ लिखलनि । मैथिलीक पहिल व्याकरणक संग ओकर उपभाषा सबहक व्याकरण सेहो लिखलनि । हॉर्नलेक संग मिलि बिहारी भाषाक तुलनात्मक शब्द-कोष तैयार करबेलनि । भारतक भाषा सर्वेक्षण तS सर्वज्ञात अछिए । ग्रियर्सन मिथिला भाषाक आधार पर मिथिलाक एक भौगोलिक नक्शा बनाओल जकरा प्राप्त करब हमरालोकनिक लेल अद्याबधि स्वप्नवते अछि ।
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“समाज-सुधारक ग्रियर्सन”
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ग्रियर्सनकें जेनाँ मिथिलाक भाषा आ साहित्यसँ प्रेम छलनि, ओकर स्वीकृति आ संरक्षणक प्रति सक्रिय सेहो छलाह । ओहिना ओ मैथिल समाजमे व्याप्त बहुविवाह, विवाहक अवसर पर साधनसँ बेशी खर्च एवम् अन्य सामाजिक दुर्गुणक निराकरणक लेल सेहो चिंतित रहैत छलाह । एकर उदाहरण थिक – “मधुबनी विवाह समिति ।” जखन शहाबाद निवासी मुंशी प्यारेलाल सरकारी नोकरी छोड़ि समाजमे व्याप्त वैवाहिक कुप्रथाक निराकरणक हेतु आन्दोलन आरम्भ भेल आ ओ लोकप्रिय भेल तS अंग्रेज सरकारक सहयोग करए लागल । एहिसँ ओ अर्घसरकारी भए गेल । बिहारक विभिन्न जिलामे शाखा खोलल गेलैक । दरभंगामे स्थापित शाखाके महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक पूर्ण सहयोग भेटल । हुनक दुनूक काकाजी महाराज कुमार गुणेश्वर सिंह एवम् महाराज कुमार गोपेश्वर सिंह ओहि समिति केर सदस्य बनाओल गेलाह । ओहि संस्थाक नामकरण भेल “मधुबनी विवाह समिति ।

“मधुबनी विवाह समिति” केर मुख्यतः दूटा विन्दू छलैक :

१) विवाहमे खर्च कम करब तथा
२) मैथिल ब्राह्मणमे बहुविवाह रोकब ।

ओहि समयमे मधुबनीक एस डी ओ जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन छलाह । ओ एहिमे पर्याप्त रूचि लेलनि ।हुनक अध्यक्षतामे १५ दिसम्बर, १८७८ ई० मे “मधुबनी विवाह समिति” केर एक बैसार भेल । बैसारक चर्चाक निम्नलिखित बिन्दू छल :

१) कन्याक विवाहमे टाकाक माँग,
२) विवाहक हेतु कन्याक विक्रय,
३) एक बिकौआक मृत्यु पर हुनक अनेक पत्नीक आजीवन दारूण्य वैधव्य,
४) माता-पिताक आर्थिक विपन्नताक कारण छोट कन्याक वृद्ध अथवा अपंगक संग विवाह,
५) कन्या भ्रूणहत्या,
६) कन्याक विवाहमे विरम्बसँ अनाचारक संभावना, एवम्
७) विवाहमे कर्ज ।

व्यापक दृष्टिक “मधुबनी विवाह समिति’क” सदस्य सभाक समय सौराठ जाय पूर्ण जाँचक उपरांत विवाहक अनुमति प्रदान करैत छलाह । पंजीकारकें स्पष्ट आदेश छल जे बहुविवाहके अनुमति प्रदान नहि करथि एवम् जँ एहि प्रकारक घटना कदाचित देखबामे अबैत छल दण्डित सेहो कयल जाइत छल ।

कन्यागत एवम् वरागत द्वारा कयल गेल खर्चक जाँच समितिक सदस्य करब आरम्भ कएलनि ।परिणाम देखबामे आयल जे खर्चके नुकेबाक यत्न सेहो होमय लागल । ग्रियर्सनक मधुबनीसँ स्थान्तरण, मुंशी प्यारेलाल एवम् महाराज लक्ष्मीश्वर सिंहक देहावसानक उपरांत एहि आन्दोलनक प्रभाव क्रमशः शिथिल होइत चलि गेल ।

एहि प्रकारें जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन मिथिला भाषाक स्वीकृति एवम् संरक्षणक संग मिथिलाक सामाजिक जीवनमे व्याप्त कुरीतिक निराकरणक क्षेत्रमे महत्वपूर्ण काज कयलनि । एहि सब अवदानक लेल मिथिलावासीके हुनका मोन पाड़ब परम पुण्यक काज थिक । जय श्री हरि ।

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