मिथिलामे अंग्रेजी राजक अमल

Image

मिथिलामे अंग्रेजी राजक अमल
(१७६५–१९४७)

१७६४क बक्सरक लड़ाइ भारतक हेतु एकटा निर्णायक युद्ध छल कारण एकरा बाद इ स्पष्ट भऽ गेल छल जे उत्तर भारतक कोनो शक्तिकेँ आब अंग्रेजसँ मुकाबिला करबाक क्षमता नहि रहि गेल छलन्हि। १७६५मे अंग्रेजी इस्ट इण्डिया कम्पनीकेँ जखन दिवानी भेटलैक तखनहिसँ भारतमे अंग्रेजी राज्यक स्थापनाक वीजारोपण सेहो भऽ गेलैक। १८म शताब्दी उत्तर भारत आ दक्षिण भारतक महत्वाकाँक्षी नेता लोकनिक स्वार्थ पूर्त्तिक युग छल जखन लोग देशक पैघ स्वार्थकेँ बिसैरि अपन छोट–छोट स्वार्थक पूर्त्तिक हेतु देशक बलिदान करैत जाइत गेलाह। तिरहूत औरंगजेब समय धरि मुर्शिदाबादक नवाबक मातहदीमे छल। १७४०सँ बिहार आ तिरहूतक भाग्य मुर्शिदाबादसँ मिलल छल आ ओहिठामक नवाब बिहारमे अपन उपनवाब बहाल करैत छलाह। अलीवर्दी खाँ पहिने बिहारेक उपनवाब छलाह। अलीवर्दीक कृपासँ अंग्रेज व्यापारी लोकनिकेँ थोड़ेक सुविधा प्राप्त भेल रहैन्ह।
१७५६मे अलीवर्दीक मृत्यु भऽ गेलैक आ तकर बाद सिराजुद्दौलाह बंगालक नवाब भेल। अंग्रेज लोकनि अपन कुचक्रसँ पलासीक युद्धमे सिराजकेँ परास्त कए मीरजाफरकेँ १७५७मे नवाब बनौलन्हि। १७६०मीरजाफरकेँ हटा कए मीरकासिमकेँ नवाब बनाओल गेल। मीरकासिम मूंगेरकेँ अपन राजधानी बनौलन्हि। हुनका अंग्रेजसँ पटइत नहि छलन्हि आ बरोबरि खटपट होइत रहन्हि आ अंग्रेज मीरकासिमक चुस्ती चालाकीसँ खार खाइत छलाह। १७६३मे अंग्रेज आ मीरकासिमक बीचक सम्बन्ध आ खराब भऽ गेल आ मीरकासिम दिल्लीक शाह आलम आ अवधक नवाब शुजाउद्दौलाहक सहाय्यसँ अंग्रेजक पटनामे स्थित कम्पनीपर धावा करबाक विचार केलन्हि। एकरे नतीजा भेल १७६४क बक्सरक लड़ाइ। एहिमे अंग्रेज लोकनि विजयी भेलाह आ १७६५मे हुनका दिवानी भेटलन्हि। बंगाल, बिहार आ उड़ीसाक ओ अप्रत्यक्ष रूपेँ मालिक भऽ गेलाह। तहियेसँ मिथिलामे अंग्रेजी राज्यक अमल मानल जा सकइयै। १७६५मे राबर्ट बारकर अपन सेनाक संग उत्तरी बिहारमे विद्रोही जमीन्दारकेँ दबेबाक हेतु ऐलाह। बेतियाक जमीन्दार जे गत दू वर्षसँ अराजक स्थितिसँ लाभ उठाकेँ विद्रोहक झंडा गारि देने छलाह तनिका इ धतेलन्हि। ओ जमीन्दार अपन किलामे नुका रहल छला। बारकरक पहुँचलाक बाद ओ तुरंत हुनकासँ समझौता कऽ लेलन्हि आ सबटा बकिऔता चुका देलन्हि। बारकर बेतियाक सम्बन्धमे बड्ड बढ़िया विवरण देने छथि। १७७२मे जखन बोर्ड आफ रेवन्युक स्थापना भेल तखन तिरहूतक सेहो राजस्वक आधारपर समझौता भेल। १७७४मे तिरहूतकेँ पटनाक अधीन कऽ देल गेलैक। १७७२मे फ्रांसीस ग्रैण्ड तिरहूतक प्रथम कलक्टर भऽ के एलाह। ग्रैण्ड नीलहा कोठीक संस्थापक सेहो छलाह आ हिनके प्रयासे समस्त तिरहूतमे नीलहा कोठीक जाल बिछा देल गेल छल। १७८७धरि ग्रैण्ड साहेब रहलाह आ एहि बीच ओ समस्त तिरहूतक सर्वेक्षण राजस्वक दृष्टिये केलन्हि। तकर बाद वार्थस्ट एला।
१७६२मे राजा प्रताप सिंह भौरसँ हटाकेँ दरभंगामे अपन राजधानी लऽ अनले छलाह। १७७०मे जखन पटनामे रेवेन्यु कौंसिलक स्थापना भेल तखन पुनः प्रताप सिंहकेँ अपन जमीन्दारीक मुकर्ररी कम्पनीसँ भेटलन्हि। केली तिरहूतक राजस्व अधीक्षक भऽ कऽ एलाह। १७७१मे प्रताप सिंह आ केलीमे मतभेद प्रारंभ भेल। राजाक ओत बहुत रास बकिऔता भऽ गेल छलन्हि आ अंग्रेज लोकनि हिनक पुरान स्तित्वकेँ नहि रहए देमए चाहैत छलथिन्ह। माधवसिंहक समयमे फेर नव हिसाबे कम्पनीक संग समझौता भेलन्हि, ओना राज्यारोहणक पूर्वहिं माधवसिंहकेँ धीरज नारायणसँ कैकटा परगन्ना भेटल छलन्हि। सबटा बकिऔता चुकौलापर राज्य पुनः माधवसिंहकेँ वापस भेलन्हि। ताहि दिनमे एक प्रकारक अस्थायित्व छल तैं लगले–लगले परिवर्त्तनो होइत रहैत छल। तथापि १७८१ सँ १७८९ धरि दरभंगा निस्तुकी रूपें माधव सिंहक अधीन रहल। वार्थस्ट कलक्टर दरभंगा आबि महाराजसँ भेट कए अनुरोध केलकन्हि जे दमामी बन्दोबस्त मानि लैथ परञ्च माधवसिंह बड़ा चिंतामे पड़ि गेल छलाह आ कोनो निर्णय लेबामे असमर्थ रहलाह। वो गवर्नर जेनरलसँ अनुरोध केलन्हि जे हुनक राज्य घुरा देल जान्हि। जखन इ सब वार्तालाप छल तखन हुनका कराम अलीक स्टेट सेहो प्राप्त भेलैन्ह (१७९५)। एहिमे १५परगन्नामे ३५टा गाम छल। सरकार बहादुर अहिबातकेँ नहि मानि एहि सब दान बला गाँव अपन राज्यमे मिला लेलक। पुनः झंझटक बाद १८००इ.मे इ सम्पत्ति राजकेँ भेटलैक। अतंतोगत्वा दरभंगा राज सेहो दमामीबन्दोबस्तक अधीन भऽ गेल।
महाराज छत्रसिंहक समयमे कम्पनीक संग सम्बन्ध आ बढ़िया भेलैक। कम्पनीकेँ तखन नेपालसँ खटपट होइत छलैक आ लड़ाइक संभावना बढ़ल जाइत छलैक। कम्पनीक प्रतिनिधि महाराजसँ भेंट केलक आ हिनकासँ अनुरोध केलकन्हि जे संभावित गोरखा आक्रमणक विरूद्ध हिनका लोकनिकेँ सतर्क रहबाक चाही। तिरहूतक कलक्टर सीलीकेँ सेहो लिखल गेलैक जे ओ क्षेत्रक सब जमीन्दार सबसँ सेना प्राप्त करबाक प्रयास करे। सीली सेजर बैडशाक नाम जे पत्र लिखने छलाह जनकपुरसँ ताहिसँ ज्ञात होइछ जे दरभंगा महाराजकेँ छोड़ि केओ सक्रिय सहयोग नहि देने छलन्हि। छत्रसिंह करीब ९हजार टाकाक मदति सेहो देने रहथिन्ह। योग्य सैनिकक व्यवस्था सेहो इ कऽ देने छलथिन्ह। हिनक खुफिया सब अंग्रेजकेँ गोरखाक आक्रमणक पूर्व सूचना एवं ओकरा सबहिक बढ़बाक बाटक संकेत सेहो देलकन्हि। नेपालक विरूद्धक संघर्षमे अंग्रेजक मुख्य सहायक (सब तरहें) छत्र सिंह छलाह आ अंग्रेज सेना तखन पुपरी तक पहुँच चुकल। खिसियाकेँ नेपालक राजा अपन सैनिककेँ इ आदेश देलन्हि जे वो तिरहूत जिलाक सब गामकेँ लूट–पाट शुरू करे। जखन नेपालक विरूद्ध अंग्रेजक जीत भेलैक तखन छत्रसिंहकेँ महाराज बहादुरक पदवी भेटलन्हि। युद्ध समाप्त भेला उत्तरो अंग्रेजक अनुरोधपर छत्रसिंहक सेना मोतिहारीमे बनल रहल। इ लोकनि सतत अंग्रेजक खैरखाह बनल रहल। महेश्वर सिंहक समयमे सिपाही विद्रोह भेल। अंग्रेजकेँ हिन्दुस्तानी जमीन्दारपर सन्देह होइते छलैक आ ताहिपर एकटा कारणो आबि गेलैक। एक अफवाह प्रसारित भेलैक जे बहेड़ाक डिपुटी मजिस्ट्रेट मिस्टर डोवटनपर महाराजक एकटा कर्मचारी बन्दुक उठौलक यद्यपि इ बात किछु दोसर छलैक। महाराज अपन स्वामीभक्ति प्रदर्शित करबाक हेतु अंग्रेजकेँ नाथपुर आ पुर्णियाँक बीच डाक व्यवस्था चालू रखबाक हेतु १६टा घोड़सवार देलथिन्ह। १०० सिपाही सेहो ओ अंग्रेजकेँ पठौलन्हि मुदा ओ लोकनि संशकित रहबाक कारणे ओकरा घुरा देलन्हि। १८५५मे संथाल विद्रोहकेँ दबेबाक हेतु सेहो महाराज हाथी इत्यादि कम्पनीक सैनिककेँ देने छलथिन्ह। महाराज महेश्वर सिंहक बाद कोर्ट आफ वार्डस भऽ गेलैक। तिरहूतमे सिपाही विद्रोहक प्रभाव कोनो रूपें कम नहि छल।
अंग्रेजक संग बढ़िया सम्बन्ध रखितहुँ महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह देशक नब्जकेँ चिन्हलन्हि आ काँग्रेसक प्रारंभिक अवस्थामे जी जानसँ मदति केलन्हि जकर उल्लेख हम पूर्वहिं कऽ चुकल छी। सिपाही विद्रोहक बाद समस्त भारतपर अंग्रेजक एकछत्र राज्य कायम भेल आ तिरहूत कमीश्नरीक एकटा अंग जिलाक रूपमे दरभंगाकेँ राखल गेल। महेश ठाकुर वंश अंग्रेजी राजक समएमे दरभंगा राजक नामें प्रसिद्ध भेल आ उत्तर बिहारक प्रायः सब जिलामे किछु न किछु हिनका लोकनिकेँ रहबे करैन्ह। रामेश्वर सिंह आ कामेश्वर सिंहक समयमे सेहो ब्रिटिश सरकारक संग सम्बन्ध बढ़िये रहलन्हि आ १९३५–१९३६मे महाराज कामेश्वर सिंह अपन स्तित्वकेँ आ दृढ़ केलन्हि आ हुनकमे बृद्धि भेलन्हि। नेटिभ राज्यक स्थिति प्राप्त करबाक हुनक पैघ अभिलाषा छलन्हि आ अहि दिशामे ओ बहुत प्रयत्नो केने छलाह। सामान्य प्रतिष्ठाक हिसाबे आन जमीन्दारक अपेक्षा दरभंगा राज्यक विशेष महत्व छलैक आ अंग्रेज लोकनि एकरा अपन एकटा पैघ सम्बल मानैत छलाह। १९३५क कानूनक बाद जे राष्ट्रीयताक एकटा वयार बहल तकरा फलें परिवर्त्तन स्वाभाविक भगेल आ १९४७मे भारतक स्वाधीनताक बाद बिहार पहिल राज्य छल जे जमीन्दारी उन्मूलनक हेतु कानून पास केलक आ बिहारसँ जमीन्दारी प्रथा समाप्त भऽ गेल। बिहारक सब जमीन्दार समाप्त भऽ गेला आ ओहि क्रममे मिथिलाक सबसँ पैघ जमीन्दार जे कहियो मिथिलेशो कहबैत छलाह। सेहो समाप्त भऽ गेला।
राधाकृष्ण चौधरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *