Ekadhshrudra, Mangrauni :: एकादशरुद्र, मंगरौनी


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Ekadhshrudra, Mangrauni :: एकादशरुद्र, मंगरौनी

एकदास रुद्र कें शिवलिंग में उभरल आकृतिक संग अद्भुत तथ्य एकादश रुद्र महादेवक :-
मधुबनी में स्थापित अछि विश्व केर एकमात्र एकादश रूद्र महादेवक मंदिर।
मधुबनी जिला के मंगरौनी गाम में अद्भूत श्री श्री ११०८ एकादश रूद्र महादेव के मंदिर छैन्ह, जे मधुबनी बस स्टैंड सँ मात्र ३ किलोमीटर दूर अछि।
कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जखन एतय आयल छलाह, त एकहि टा शक्ति वेदी पर भगवान शंकर के ग्यारह अलौकिक रूप के देखि भावविह्वल भ’ गेलाह आ कहलनि की अहि तरहक मंदिर विश्व में एकमात्र एतहि टा अछि, जतय तांत्रिक विधि सँ शिव के ग्यारहो लिंग रूप के स्थापित कएल गेल होई।
पंडित बाबा आत्माराम जी के अनुसारे महादेवक मंत्र ऊं नम: शिवाय छैन्ह, मुदा अहि मंदिर के संस्थापक तांत्रिक पंडित मुनीश्वर झा (१८९६-१९८६) अहि पंच अक्षर के स्थान पर ग्यारह अक्षरक मंत्र तैयार केलनि ऊॅ नम: शिवाय, एकादश रुद्राय।
अहि मंत्र के १०० बेर जाप कएला सँ १२०० जापक फल भेटैत छैक, कियाक त’ १०० बेर ऊॅ नम: शिवाय, आ ११०० बेर एक संग ऊॅ एकादश रुद्राय के जाप सँ अर्थात कुल १२०० बेर जाप भ जैत छैक। अहिठाम आबि भक्त के आध्यात्मिक सुखक प्राप्ति होइत छैन्ह।
१० मई सँ २१ मई २००० तक एकहि शक्ति वेदी पर स्थापित अहि शिवलिंग सब पर विभिन्न प्रकारक आकृति उभरय लागल, अहि आकृति सबहक बनब एखनहु जारी अछि। सब शिवलिंग में उभरल चित्रक जानकारी-
1) महादेव – ३० जुलाई २००१ कें अर्धनारीश्वर केर रूप प्रकट भेलाह!
शिव- प्रभु श्री राम कहने छलाह की हमही शिव छी। अहि लिंग में सिंहासनक चित्र उभरल अछि, जे प्रभु श्रीराम के सिंहासन के दर्शा रहल अछि।
रुद्र:- भय के हरय वाला अहि लिंग में बजरंगवली के पहाड़ लय उड़ैत बड्ड अद्भुत चित्र प्रकट भेल अछि।
शंकर- गीता के दशम अध्याय में श्रीकृष्ण कहलनि की हमही शंकर छी। अहि लिंग में श्रीकृष्ण केर सुदर्शन चक्र, बांसुरी आ बाजुबंध स्पष्ट दृष्टिगोचर होईत अछि।
नीललोहित: – जखन महादेव विषपान केने छलाह, तखन हीनक नाम नीललोहित: पड़ल छल। अहि लिंग में सांप प्रकट भेल अछि ।
ईशान: – हिमालय पर निवास केनिहार महादेव जे केदारनाथ छथि ९जुलाई २००१ साउनक पहिल सोमवारी के दिन राजेश्वरी क रूप प्रकट भेल आ पंचमुखी शिवलिंग प्रकट भेलाह। एकर अलावा ओमकार आ महाकालक गदा सेहो देखाई पड़ैत अछि।
विजय: – अहि शिवलिंग में छवि बनैत जा रहल अछि परञ्च आकृति एखन स्पष्ट नै भेल अछि।
भीम: – महादेवक एक टा रूप भीम सेहो अछि। अहि शिवलिंग में गदा केर छवि सामने आयल अछि।
देवदेव: – ई लिंग सूर्यक स्वरूप थिकै अहि शिवलिंग में लिंग के निचला दुनु भाग में सूर्यक किरण फुटि क शीर्ष में मिल रहल छैक। संगहि त्रिशूलक चित्र सेहो देखाइत अछि
भवोद्भव: – अहि लिंग में उमा-शंकरक आकृति प्रकट भेल अछि।
कपालिश्च: – महादेवक एक टा रूप बजरंगवली सेहो छैन आ इ लिंग धीरे धीरे लाल भ’अ रहल अछि।
अहि एकादश रूद्र महादेव मंदिर के पुजारी बाबा आत्माराम के अनुसारें प्रसिद्ध तांत्रिक मुनीश्वर झा सन १९५३ में अहि मंदिरक स्थापना केलनि सबटा शिव लिंग कारी ग्रेनाईट पाथरक अछि, जे २०० बरख सँ अधिक पुरान अछि। प्रत्येक सोम क साँझ म दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, चन्दन आदि सँ अहि शिवलिंग सबहक स्नान आ श्रिंगार होईत अछि। सोम केर साँझ के एतय अद्भुत छटा देखय लेल भेंटैत अछि। प्रत्येक सोमवारी के अहिठाम भंडारा केर आयोजन होईत अछि। महाप्रशाद खएला मात्र सँ शरीरक सभ कष्ट दूर भ जैत छैक,जे भक्त कामना सँ एतय अबैत छथि हुनकर कामना अवश्य पूर्ण होइत छैन्ह। अहि मंदिर के दहिना कात ग्रेनाईट आ अष्टधातु सँ बनल राधेश्याम मंदिर अछि जाहिमे विष्णुक दशावतार रूप तथा श्री विघायंत्र अछि जकर काज छै लक्ष्मी सरस्वती के बराबर रखैत लक्ष्य के प्राप्त केनाइ, प्राय: अहि यन्त्र केर दर्शन सेहो अन्यत्र दुर्लभ अछि।
सामने विशाल पवित्र सरोवर,बगल में विष्णु पद गया क्षेत्र अछि। एहनो मान्यता छैक की जे व्यक्ति अपन पितरक पिंड दान करय गया नहीं जा पबैत छथि, हुनका पितर के एतय पिंड दान करय सँ मुक्ति भेंट जैत छैन। एतहि समीप में पंडित मुनीश्वर झा केर समाधी छैन। एतय महाकाल केर मंदिर अछि, ओकर कात में पीपरक विशाल वृक्ष छैक। महादेव मंदिर में भगवान शिव पार्वतीक एकटा दुर्लभ मूर्ति सेहो प्रतिष्ठित अछि, जाहि मेंमहादेवक बाम जांघ पर पार्वती बैसल छथि। महादेव क बामा हाथ पार्वती के डाँड़ पर अछि और दाहिना हाथ हुनक ओष्ठ पर छैन। अहि मूर्ति केर बाम दिस बसहा आ बगल में महाकाली, महालक्ष्मी , महासरस्वती यन्त्र आ विष्णु पादुका छैक।

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