Darbhanga College Of Engineering


Darbhanga College Of Engineering

Darbhanga College Of Engineering
दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE): इतिहास से वर्तमान तक
​दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) बिहार के प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक है, जो तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर बिहार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस संस्थान की यात्रा स्थापना के शुरुआती संघर्षों से लेकर आज एक आधुनिक तकनीकी संस्थान बनने तक काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है।
​दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का इतिहास इसके मूल परिसर से जुड़ा है। यह कैंपस मूल रूप से ‘जगन्नाथ Mishra Institute of Technology’ (JMIT) के नाम से 1990 के दशक में स्थापित किया गया था, लेकिन कुछ प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से इसे कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था। इसके बाद बिहार सरकार के प्रयासों से साल 2008 में इस परिसर को पुनर्जीवित किया गया और इसे एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में नए सिरे से शुरू किया गया, जिसका नाम बदलकर दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) रखा गया। वर्ष 2008 में ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस कॉलेज का औपचारिक उद्घाटन किया गया था। इस कॉलेज के ऐतिहासिक और मुख्य प्रशासनिक भवन का अपना एक अलग महत्व है, जिसे 1934 के भीषण भूकंप के बाद 1935 में हरिहरपुर एस्टेट के जमींदार द्वारा एक भूकंप-रोधी डिजाइन में बनवाया गया था।
​यह कॉलेज बिहार सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत संचालित होता है और इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त है। अकादमिक संबद्धता के मामले में, शुरुआती वर्षों में यह ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) से जुड़ा हुआ था, जिसके बाद इसे आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU), पटना से संबद्ध किया गया और वर्तमान में यह बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय (BEU), पटना के अंतर्गत आता है।
​कैंपस और अवसंरचना की बात करें तो यह संस्थान दरभंगा के मधupur, मब्बी क्षेत्र में स्टेट हाईवे-75 के पास लगभग 42 एकड़ के विशाल परिसर में फैला हुआ है। दरभंगा जंक्शन से इसकी दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे उपलब्ध हैं। यहाँ छात्रों के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस प्रयोगशालाएं (Labs), एक विशाल केंद्रीय पुस्तकालय जिसमें हजारों की संख्या में तकनीकी किताबें और डिजिटल संसाधन मौजूद हैं, तथा छात्र-छात्राओं के लिए अलग से छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद प्रतियोगिताएं और वार्षिक उत्सव जैसे आयोजन भी नियमित रूप से किए जाते हैं।
​वर्तमान में कॉलेज में पठन-पाठन और कोर्सेस का दायरा काफी व्यापक हो चुका है। यहाँ स्नातक स्तर पर सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, साइबर सिक्योरिटी, और फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी जैसे लोकप्रिय बी.टेक पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। इसके साथ ही स्नातकोत्तर (M.Tech) स्तर पर पावर सिस्टम जैसे कोर्स भी उपलब्ध हैं। यहाँ प्रवेश मुख्य रूप से जेईई मेन (JEE Main) स्कोर और बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECE) के माध्यम से आयोजित होने वाली UGEAC काउंसलिंग के जरिए होता है, जबकि डिप्लोमा धारकों के लिए लेटरल एंट्री का भी प्रावधान है।
​आज दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ के छात्र तकनीकी प्रतियोगिताओं, उद्यमिता (E-Cell) और विभिन्न प्रोजेक्ट्स में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस संस्थान से पास आउट होने वाले छात्र देश-विदेश के प्रतिष्ठित उद्योगों, सॉफ्टवेयर कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्रों (PSUs) और सिविल सेवाओं में अपनी सेवाएं देकर कॉलेज और अपने राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। संक्षेप में कहा जाए तो, अपनी स्थापना के उतार-चढ़ाव से उबरते हुए यह कॉलेज आज बिहार में तकनीकी शिक्षा की एक मजबूत नींव बन चुका है।

संकलन :
शिवांगी झा
First Year,
Electronics And Electrical Engineering
DCE, Darbhanga