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	Comments on: मुल्ला तकियाक वयाजक अनुसार मिथिलाक इतिहास	</title>
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	<description>All about maithil culture</description>
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		By: Mani Bushan		</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Mani Bushan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Jun 2021 15:00:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[In reply to &lt;a href=&quot;https://www.maithilmanch.in/history/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b8/#comment-844&quot;&gt;बलराम मिश्र मैथिल&lt;/a&gt;.

Kripya apan sampark number diya ya 8826566136 par whatsapp par sampark kari]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>In reply to <a href="https://www.maithilmanch.in/history/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b8/#comment-844">बलराम मिश्र मैथिल</a>.</p>
<p>Kripya apan sampark number diya ya 8826566136 par whatsapp par sampark kari</p>
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		By: बलराम मिश्र मैथिल		</title>
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		<dc:creator><![CDATA[बलराम मिश्र मैथिल]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jun 2021 01:42:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मिथिला की सारस्वत सुषमा (लेखक विनयानंद झा)केर पृष्ठ संख्या 182- 184मे खण्डवला राजवंशक वंशावली उपलब्ध अछि। तदनुसार महेश ठाकुरक पूर्वज गंगाधर उपाध्याय अपन पैतृक ग्राम खण्डवासँ आबि मिथिलाक गंगौली ( गनौली)गाममे रहैत रहथि, मुदा खण्डवासँ सम्पर्क रखने रहथि। गंगाधर उपाध्यायकेँ दुइ पुत्र- वीर आ नारायण। नारायणक पुत्र शूलपाणि। शूलपाणिक पुत्र हाले आ संकर्षण ठाकुर। संकर्षण ठाकुर खण्डवामे रहथि। संकर्षण ठाकुरकेँ पाँच पुत्र-भद्रेश्वर, दामोदर, नीकण्ठ, श्रीकण्ठ, ध्यानकण्ठ। श्रीकण्ठ मिथिलामे रहलाह। श्रीकण्ठकेँ सात पुत्र- श्यामकण्ठ, हरिकण्ठ, नित्यानंद, गणेश्वर, देवानंद, हरिदत्त, हरिकेश। गणेश्वरकेँ तीन पुत्र- हलेश्वर, चक्रेश्वर, पक्षेश्वर। चक्रेश्वरक पुत्र पद्मनाभ। पद्मनाभक पुत्र पुरुषोत्तम। पुरुषोत्तमक पुत्र ज्ञानपति। ज्ञानपतिकेँ दुइ पुत्र- उमापति, सुरपति। सुरपतिकेँ तीन पुत्र- श्रीपति, लाखू, महीपति। श्रीपतिकेँ तीन पुत्र- हरपति, नरपती, चन्द्रपति। चन्द्रपति ठाकुरकेँ चारि पुत्र- मम. थेघ, मम. मेघ(भगीरथ), मम. दामोदर, महाराजाधिराज महामहोपाध्याय महेश ठाकुर भेलथिन। महेश ठाकुर अपन पूर्वजक मौजे गंधवारिमे रहैत रहथि। महेश ठाकुरक सान्निध्यमे अनेको शिष्य विद्यार्जन कयलनि। रघुनंदन राय महेश ठाकुरक शिष्य रहथिन। अकबरक दरबारमे विद्वान् लोकनिक शास्त्रार्थ आयोजित रहै। ताहिमे महेश ठाकुर सेहो आमंत्रित रहथि, मुदा स्वयं नहि जाय अपन मेधावी शिष्य रघुनंदनकेँ शास्त्रार्थ हेतु मुगल दरबारमे पठौलथिन। ताहि शास्त्रार्थमे रघनंदन राय विजयी घोषित भेलाह। पुरस्कारस्वरूप रघुनंदनकेँ मुगल दरबारसँ भौराराजक ( भौरा, मधुबनी) प्राप्ति भेलनि, मुदा रघुनंदन ताहि भौराराजकेँ गुरुदक्षिणाक रूपमे अपन गुरुदेव महेश ठाकुरकेँ देबाक हेतु मुगल दरबारमे अनुरोध कयलनि, से मान्य भेलनि। तत्पश्चात् मुगल दरबारसँ आदेशपत्र निर्गत भेलै। तदनुसार महामहोपाध्याय महेश ठाकुर महाराजाधिराज भऽ गेलाह। 
ध्यातव्य अछि जे महेश ठाकुरक पूर्वज मिथिलासँ बाहर खण्डवामे रहथि। मूल छनि- खड़ौरे भौर। अर्थात् गंगाधर उपाध्यायक पूर्वज मिथिलाक गाम खड़ौराक वासी रहथि। मिथिलासँ खण्डवा(मप्र.) चल गेल छल हेताह आ  हुनक वंशज मिथिला आबि गेल हेताह। 
रघनंदन राय क्योटीक निकट कोन गामक रहथि, से हमरा मोन नहि अछि। मैथिल ब्राह्मणक पंजीकारसँ रघुनंदन रायक सम्बन्धमे जनतब प्राप्त कऽ सकैत छी।
जय मिथिला!
अनंत मंगलकामना अछि।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मिथिला की सारस्वत सुषमा (लेखक विनयानंद झा)केर पृष्ठ संख्या 182- 184मे खण्डवला राजवंशक वंशावली उपलब्ध अछि। तदनुसार महेश ठाकुरक पूर्वज गंगाधर उपाध्याय अपन पैतृक ग्राम खण्डवासँ आबि मिथिलाक गंगौली ( गनौली)गाममे रहैत रहथि, मुदा खण्डवासँ सम्पर्क रखने रहथि। गंगाधर उपाध्यायकेँ दुइ पुत्र- वीर आ नारायण। नारायणक पुत्र शूलपाणि। शूलपाणिक पुत्र हाले आ संकर्षण ठाकुर। संकर्षण ठाकुर खण्डवामे रहथि। संकर्षण ठाकुरकेँ पाँच पुत्र-भद्रेश्वर, दामोदर, नीकण्ठ, श्रीकण्ठ, ध्यानकण्ठ। श्रीकण्ठ मिथिलामे रहलाह। श्रीकण्ठकेँ सात पुत्र- श्यामकण्ठ, हरिकण्ठ, नित्यानंद, गणेश्वर, देवानंद, हरिदत्त, हरिकेश। गणेश्वरकेँ तीन पुत्र- हलेश्वर, चक्रेश्वर, पक्षेश्वर। चक्रेश्वरक पुत्र पद्मनाभ। पद्मनाभक पुत्र पुरुषोत्तम। पुरुषोत्तमक पुत्र ज्ञानपति। ज्ञानपतिकेँ दुइ पुत्र- उमापति, सुरपति। सुरपतिकेँ तीन पुत्र- श्रीपति, लाखू, महीपति। श्रीपतिकेँ तीन पुत्र- हरपति, नरपती, चन्द्रपति। चन्द्रपति ठाकुरकेँ चारि पुत्र- मम. थेघ, मम. मेघ(भगीरथ), मम. दामोदर, महाराजाधिराज महामहोपाध्याय महेश ठाकुर भेलथिन। महेश ठाकुर अपन पूर्वजक मौजे गंधवारिमे रहैत रहथि। महेश ठाकुरक सान्निध्यमे अनेको शिष्य विद्यार्जन कयलनि। रघुनंदन राय महेश ठाकुरक शिष्य रहथिन। अकबरक दरबारमे विद्वान् लोकनिक शास्त्रार्थ आयोजित रहै। ताहिमे महेश ठाकुर सेहो आमंत्रित रहथि, मुदा स्वयं नहि जाय अपन मेधावी शिष्य रघुनंदनकेँ शास्त्रार्थ हेतु मुगल दरबारमे पठौलथिन। ताहि शास्त्रार्थमे रघनंदन राय विजयी घोषित भेलाह। पुरस्कारस्वरूप रघुनंदनकेँ मुगल दरबारसँ भौराराजक ( भौरा, मधुबनी) प्राप्ति भेलनि, मुदा रघुनंदन ताहि भौराराजकेँ गुरुदक्षिणाक रूपमे अपन गुरुदेव महेश ठाकुरकेँ देबाक हेतु मुगल दरबारमे अनुरोध कयलनि, से मान्य भेलनि। तत्पश्चात् मुगल दरबारसँ आदेशपत्र निर्गत भेलै। तदनुसार महामहोपाध्याय महेश ठाकुर महाराजाधिराज भऽ गेलाह।<br />
ध्यातव्य अछि जे महेश ठाकुरक पूर्वज मिथिलासँ बाहर खण्डवामे रहथि। मूल छनि- खड़ौरे भौर। अर्थात् गंगाधर उपाध्यायक पूर्वज मिथिलाक गाम खड़ौराक वासी रहथि। मिथिलासँ खण्डवा(मप्र.) चल गेल छल हेताह आ  हुनक वंशज मिथिला आबि गेल हेताह।<br />
रघनंदन राय क्योटीक निकट कोन गामक रहथि, से हमरा मोन नहि अछि। मैथिल ब्राह्मणक पंजीकारसँ रघुनंदन रायक सम्बन्धमे जनतब प्राप्त कऽ सकैत छी।<br />
जय मिथिला!<br />
अनंत मंगलकामना अछि।</p>
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